ईमानदार अधिकारी की कार्यशैली से बदली धनबाद अंचल कार्यालय की तस्वीर, बिचौलियों पर लगी लगाम
कन्हैया कुमार/धनबाद
धनबाद :- आम लोगों के काम का समय पर निष्पादन हो और सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ व बिचौलियों की भूमिका खत्म हो, इसे लेकर धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने सभी कार्यालयों को सख्त निर्देश दिया है। इसी दिशा में धनबाद अंचल कार्यालय में भी पिछले करीब एक वर्ष से कार्यशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकारी और कर्मचारी देर शाम तक कार्यालय में बैठकर आम लोगों की समस्याओं का निष्पादन कर रहे हैं।
एक समय था जब धनबाद अंचल कार्यालय के बाहर बिचौलियों और कथित दलालों की भीड़ लगी रहती थी। जमीन से जुड़े कार्यों, दाखिल-खारिज और म्यूटेशन जैसे मामलों में आम लोगों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। फर्जी कागजात के आधार पर म्यूटेशन कराने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लेकिन अगस्त 2025 में धनबाद के अंचल अधिकारी के रूप में राम प्रवेश की पदस्थापना के बाद कार्यालय की कार्यशैली में बदलाव की शुरुआत हुई।
शिकायतकर्ता से खुद मिलते हैं सीओ
पदभार संभालने के बाद सीओ राम प्रवेश ने सबसे पहले शिकायत लेकर आने वाले लोगों से स्वयं मिलकर उनकी समस्याओं को समझना शुरू किया। उन्होंने कर्मियों को भी निर्देश दिया कि किसी भी मामले में केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहें, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर स्वयं स्थल पर जाकर जांच करें।
बताया जाता है कि इस व्यवस्था का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा और अंचल कार्यालय में लगने वाली अनावश्यक भीड़ कम हुई। कई स्थानीय लोगों ने कार्यालय की कार्यशैली में आए बदलाव के लिए अंचल अधिकारी को धन्यवाद भी दिया।
बिचौलियों के दबाव से दूरी
राम प्रवेश की कार्यशैली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने कथित बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों के दबाव से दूरी बनाए रखने की कोशिश की। चाहे किसी राजनीतिक दल से जुड़े लोग हों या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति, उनका स्पष्ट रुख रहा कि सरकारी कार्य नियम और दस्तावेजों के आधार पर ही होंगे।
उनका कहना रहा कि पद की गरिमा बनाए रखने के लिए जो भी चुनौती सामने आएगी, उसका सामना किया जाएगा और किसी भी विवादित अथवा दलाली वाले कार्य का हिस्सा नहीं बनेंगे।
इसी रवैये के कारण कई ऐसे लोग भी उनसे नाराज हुए, जिनकी अपेक्षाएं नियमों के बजाय व्यक्तिगत प्रभाव या दबाव के आधार पर काम कराने की रही हों।
बलियापुर में भी अवैध कोयला परिवहन पर कार्रवाई
राम प्रवेश की कार्यशैली धनबाद अंचल तक सीमित नहीं रही है। बलियापुर में पदस्थापित रहने के दौरान भी उन्होंने अवैध कोयला परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। बताया जाता है कि उन्होंने कई मौकों पर बेखौफ होकर अवैध कोयला वाहनों को रोककर जब्त किया था।
अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई के कारण ऐसे मामलों में उनके सामने दबाव और चुनौतियां भी आती रहीं, लेकिन उन्होंने कार्रवाई से पीछे हटने के बजाय नियमों के अनुसार काम करने को प्राथमिकता दी।
पुराने मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर की वापसी की चर्चा
इधर धनबाद अंचल कार्यालय से जुड़ा एक पुराना मामला भी चर्चा में है। पूर्व में अंचल कार्यालय के एक कंप्यूटर ऑपरेटर से एटीएस द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद उसे तत्काल कार्यालय से हटा दिया गया था। अब उसकी पुनः वापसी को लेकर अंचल कार्यालय में कथित रूप से कुछ बिचौलियों और दलाली से जुड़े लोगों के सक्रिय होने की चर्चा है।
हालांकि इस मामले में आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या गलत धारणा को जगह न मिले।
ईमानदार कार्यशैली बनी चुनौती
सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों के अनुसार काम करना जितना जरूरी है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। धनबाद अंचल कार्यालय में राम प्रवेश की कार्यशैली को लेकर जहां आम लोगों के एक वर्ग में सकारात्मक चर्चा है, वहीं उनके सख्त रवैये से कथित रूप से वे लोग असहज हैं जो प्रभाव या दबाव के जरिए सरकारी कार्य कराने के आदी रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि धनबाद अंचल कार्यालय में शुरू हुई यह व्यवस्था आगे भी इसी तरह जारी रहती है या नहीं। फिलहाल इतना जरूर है कि आम लोगों के बीच यह संदेश गया है कि यदि अधिकारी नियमों के तहत काम करें और बिचौलियों की भूमिका को सीमित करें, तो सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव संभव है।
