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रंजय सिंह हत्याकांड में फैसले की घड़ी, 5 सितंबर को आएगा कोर्ट का निर्णय

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कन्हैया कुमार/धनबाद

नौ साल पुराने चर्चित हत्याकांड में 23 गवाहों की गवाही और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला, हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा पर टिकी निगाहें

धनबाद। धनबाद के बहुचर्चित राजीव रंजन उर्फ रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल बाद अब फैसले की घड़ी आ गई है। धनबाद स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और 5 सितंबर को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 23 गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। गवाहों के बयान, पुलिस जांच और मामले से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर चली सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।

यह मामला धनबाद के उन चर्चित हत्याकांडों में शामिल रहा है, जिसने जिले के राजनीतिक और आपराधिक घटनाक्रम को लंबे समय तक प्रभावित किया। रंजय सिंह की हत्या के बाद धनबाद में वर्चस्व, पुरानी रंजिश और राजनीतिक प्रभाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई थीं। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हत्या के पीछे पुराने विवाद और वर्चस्व से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा था।

29 जनवरी 2017 को चाणक्य नगर मोड़ के पास हुई थी हत्या

रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 को सरायढेला थाना क्षेत्र के चाणक्य नगर मोड़ के पास गोली मारकर की गई थी। घटना के वक्त रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। हमले में रंजय सिंह की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद राजा यादव किसी तरह बच गए।

हत्या की इस घटना के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। घटना के कारणों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस ने कई स्तरों पर जांच की। जांच के दौरान पुराने विवाद, आपसी रंजिश और क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर चल रहे तनाव को भी महत्वपूर्ण बिंदु माना गया।

घटना के बाद राजा यादव पुलिस जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बने। पुलिस ने उनके बयान को भी जांच का हिस्सा बनाया। लंबे समय तक चले इस मामले में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा गया।

23 गवाहों की गवाही ने मामले को आगे बढ़ाया

रंजय सिंह हत्याकांड का ट्रायल लंबा चला। अभियोजन पक्ष की ओर से करीब 23 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इन गवाहों के बयान के आधार पर अभियोजन पक्ष ने मामले में लगाए गए आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।

पुलिस जांच के दौरान नंदकुमार सिंह उर्फ मामा को हत्या में शूटर के तौर पर आरोपित किया गया था। वहीं हर्ष सिंह पर हत्या की साजिश रचने और शूटरों को सहयोग देने से जुड़े आरोप लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ही यह तय होगा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित कर पाया है या नहीं।

लगभग नौ वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान इस मामले में कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए। समय बीतने के साथ यह मामला धनबाद के चर्चित हत्याकांडों में शामिल हो गया।

संजीव सिंह के काफिले को रास्ता देने को लेकर विवाद का भी जिक्र

पुलिस जांच के दौरान इस बात का भी उल्लेख सामने आया कि तत्कालीन भाजपा विधायक संजीव सिंह के काफिले को रास्ता देने को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी दौरान रंजय सिंह और राजा यादव मोटरसाइकिल से जा रहे थे।

घटना के बाद राजा यादव इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह बने। पुलिस ने उनकी भूमिका और घटना के समय की परिस्थितियों को गंभीरता से जांचा। जांच के दौरान पुलिस की नजर हर्ष सिंह पर भी रही और उनकी भूमिका को लेकर पड़ताल की गई।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ नंदकुमार सिंह उर्फ मामा को मुख्य आरोपी के तौर पर चिह्नित किया गया। इसके बाद केस की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और अदालत में आरोपों तथा बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर सुनवाई होती रही।

रंजय हत्याकांड के बाद बदले धनबाद के समीकरण

रंजय सिंह की हत्या के बाद धनबाद के राजनीतिक और आपराधिक समीकरणों में भी हलचल देखने को मिली। यह घटना उस दौर में हुई जब धनबाद में राजनीतिक वर्चस्व और आपसी विवाद से जुड़े कई मामले चर्चा में थे। रंजय सिंह की हत्या के कुछ महीनों बाद तत्कालीन डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या ने पूरे मामले और उस समय के घटनाक्रम को और अधिक चर्चित बना दिया।

नीरज सिंह हत्याकांड ने धनबाद की राजनीति और अपराध जगत में हलचल मचा दी थी। इसके बाद पुराने विवादों और आपसी संबंधों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं। ऐसे में रंजय सिंह हत्याकांड भी लगातार सुर्खियों में बना रहा।

हालांकि, किसी भी मामले में विभिन्न घटनाओं के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही माना जा सकता है।

लंबे ट्रायल के बाद अब फैसले का इंतजार

रंजय सिंह हत्याकांड में सुनवाई पूरी होने के बाद अब 5 सितंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब नौ साल से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और प्रस्तुत किए गए साक्ष्य कानूनी कसौटी पर कितने मजबूत साबित होते हैं।

अदालत का फैसला इस बात पर आधारित होगा कि मामले में प्रस्तुत गवाहों के बयान, पुलिस जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से आरोप कानूनी रूप से सिद्ध होते हैं या नहीं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो अदालत कानून के मुताबिक आगे की सजा तय करेगी और यदि अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहता है तो आरोपियों को कानून के अनुसार राहत मिल सकती है।

फैसले को लेकर बढ़ी उत्सुकता

करीब नौ साल पुराने इस मामले में फैसला आने से पहले रंजय सिंह से जुड़े परिवार, मामले के पक्षकारों और धनबाद के लोगों की नजर अदालत की कार्यवाही पर है। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब मामले का कानूनी निष्कर्ष सामने आने वाला है।

रंजय सिंह की हत्या के बाद शुरू हुई जांच से लेकर अदालत में चली सुनवाई तक इस मामले ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 23 गवाहों की गवाही, पुलिस जांच और लंबे ट्रायल के बाद अब अदालत का निर्णय इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।

5 सितंबर को एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय के फैसले के साथ करीब नौ वर्ष पुराने इस चर्चित हत्याकांड की कानूनी तस्वीर साफ हो जाएगी। अदालत का निर्णय ही तय करेगा कि आरोपों में घिरे लोगों की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर किस रूप में स्थापित होती है और मामले का अंतिम कानूनी परिणाम क्या रहता है।

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