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“सैया भये कोतवाल, तो अब डर काहे का?” वंदे भारत के चालक केबिन में वायरल रील पर अब तक कार्रवाई नहीं, सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

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KANHAIYA KUMAR/DHANBAD

धनबाद: “सैया भये कोतवाल, तो अब डर काहे का” — यह कहावत इन दिनों वंदे भारत एक्सप्रेस के चालक केबिन में बनाई गई एक वायरल रील पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार धनबाद रेल मंडल (डीआरएम) कार्यालय के ऑपरेटिंग विभाग से जुड़े एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर और उनकी पत्नी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

करीब 29 सेकेंड के इस वीडियो में ट्रैफिक इंस्पेक्टर की पत्नी भोजपुरी गाने पर चालक केबिन के अंदर अलग-अलग अंदाज में रील बनाती दिखाई दे रही हैं। वहीं उनके पति भी मुस्कुराते हुए वीडियो में नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो वंदे भारत एक्सप्रेस के चालक केबिन में बनाया गया, जहां आम यात्रियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है।

सूत्रों के अनुसार परसाबाद स्टेशन के पास हुई थी शूटिंग

सूत्रों का दावा है कि यह वीडियो हावड़ा से गया जाने वाली 22303 हावड़ा-गया वंदे भारत एक्सप्रेस में बनाया गया। रील की शूटिंग धनबाद रेल मंडल के परसाबाद स्टेशन के आसपास की गई थी। वीडियो में स्टेशन का नाम भी दिखाई देने की बात कही जा रही है, जिससे स्थान की पुष्टि होने का दावा किया जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

रेलवे के नियमों के अनुसार चालक केबिन एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र होता है, जहां केवल अधिकृत रेलकर्मियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। ऐसे में यदि किसी बाहरी व्यक्ति ने चालक केबिन में प्रवेश कर वीडियो बनाया है, तो यह सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला माना जा सकता है।

रेलवे सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि चालक केबिन में किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल

वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) सहित अन्य माध्यमों पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने रेलवे से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आम यात्रियों के लिए नियम सख्त हैं तो अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए।

अब तक नहीं हुई कोई आधिकारिक कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही रेलवे प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान जारी किया गया है। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली पद पर होने के कारण मामले में कार्रवाई टल रही है?

यदि वीडियो वास्तविक रूप से चालक केबिन में बनाया गया है और जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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