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रांची में तिरंगा यात्रा विवाद: देवेंद्र नाथ महतो को रोके जाने पर JLKM ने राज्यपाल से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

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रांची : स्वतंत्रता दिवस के दिन छात्र आंदोलन के नेता एवं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर JLKM के प्रदेश प्रवक्ता महेश कुमार दुबे ने झारखंड के राज्यपाल को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

15 अगस्त को रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल में इलाजरत थे। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्रों द्वारा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही थी। महतो भी तिरंगा यात्रा में शामिल होकर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देना चाहते थे। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने उन्हें अस्पताल से बाहर निकलकर यात्रा में शामिल होने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और महतो के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

JLKM प्रवक्ता महेश कुमार दुबे ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा यात्रा में शामिल होने से देवेंद्र नाथ महतो को रोकना गंभीर और चिंताजनक घटना है। उन्होंने आरोप लगाया कि महतो को अस्पताल से बाहर निकलने से रोकने के दौरान पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया। महतो ने भी आरोप लगाया है कि इस दौरान उनके सीने में चोट लगी।

पत्र में JLKM ने इस कार्रवाई के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन ने राज्यपाल से पूछा है कि आखिर देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने का कानूनी आधार क्या था और उन्हें किस अधिकारी के आदेश पर रोका गया। साथ ही पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने तथा इस कार्रवाई के पीछे किसी न्यायालयीन या वैधानिक आदेश के मौजूद होने को लेकर भी स्पष्टीकरण की मांग की गई है।

संविधान का हवाला देते हुए उठाए सवाल

JLKM ने अपने पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का हवाला देते हुए कहा है कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान और उसके साथ तिरंगा यात्रा में शामिल होना नागरिकों की देशभक्ति की अभिव्यक्ति से जुड़ा विषय है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किसी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने की कार्रवाई पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

राज्यपाल से पांच प्रमुख मांगें

महेश कुमार दुबे ने राज्यपाल से पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए कई मांगें रखी हैं। इनमें घटना का तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब करना, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराना, अस्पताल परिसर एवं घटना से जुड़े CCTV फुटेज और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखना तथा यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग या अनावश्यक बल प्रयोग प्रमाणित होता है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना शामिल है।

इसके अलावा JLKM ने देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें उचित चिकित्सा और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की है। संगठन ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

JPSC-JSSC विवाद के बीच बढ़ा तनाव

गौरतलब है कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। स्वतंत्रता दिवस के दिन छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई और जांच की मांग कर रहे हैं।

इसी आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात भी सामने आई है।

वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि हाल की अनियमितताओं से युवाओं का परीक्षा प्रणाली और शासन पर विश्वास प्रभावित हुआ है तथा सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम कर रही है।

अब JLKM द्वारा राज्यपाल को पत्र भेजे जाने के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच को लेकर सबकी निगाहें टिकी हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर तिरंगे के सम्मान से जुड़े किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।

— रिपोर्ट : धनबाद/रांची ब्यूरो

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