मूसलाधार बारिश से मैथन-पंचेत डैम का जलस्तर बढ़ा, करीब एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया
संजय चौरसिया/धनबाद
धनबाद: पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण धनबाद और आसपास के इलाकों में नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। लगातार बारिश का असर मैथन और पंचेत डैम पर भी देखने को मिल रहा है। दोनों डैमों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार पानी की आवक बढ़ने के कारण जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थिति को देखते हुए डीवीसी ने मैथन और पंचेत डैम से करीब एक लाख क्यूसेक पानी पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों की ओर छोड़ा है।
इस संबंध में डीवीआरआरसी के सदस्य सचिव संजीव कुमार की ओर से पहले ही संबंधित क्षेत्रों के लिए सूचना जारी कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। जानकारी के अनुसार, मैथन डैम से लगभग 45,000 क्यूसेक और पंचेत डैम से करीब 54,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के मद्देनजर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मैथन डैम का जलस्तर 487 फीट
डीवीसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक बढ़ने के कारण मैथन डैम का जलस्तर 487 फीट तक पहुंच गया है। मैथन डैम का खतरे का निशान 495 फीट निर्धारित है। यानी फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से करीब 8 फीट नीचे है।
हालांकि जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए डीवीसी और केंद्रीय जल आयोग के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जलग्रहण क्षेत्र में बारिश और पानी की आवक के आधार पर डैम से पानी छोड़ने की मात्रा में आगे बदलाव किया जा सकता है।
पंचेत डैम का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा
वहीं, पंचेत डैम का जलस्तर 416 फीट तक पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 425 फीट है। इस तरह पंचेत डैम का जलस्तर भी फिलहाल खतरे के निशान से करीब 9 फीट नीचे है।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार पानी आने के कारण पंचेत डैम से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। वर्तमान में यहां से करीब 54,800 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है।
केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर खोले गए गेट
जलस्तर में लगातार वृद्धि और डैम के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी के तेज बहाव को देखते हुए केंद्रीय जल आयोग (CWC) के निर्देश पर डीवीसी ने मैथन डैम के पांच गेट और चार गैलरी खोल दिए हैं। इनसे नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जा रहा है।
इसी तरह पंचेत डैम के गेट भी खोले गए हैं। अधिकारियों की ओर से पानी की निकासी और डैम में आने वाले पानी की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि जलस्तर को नियंत्रित रखा जा सके।
पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में अलर्ट
मैथन और पंचेत डैम से छोड़े जा रहे पानी का असर पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में पड़ सकता है। इसी वजह से संबंधित क्षेत्रों को पहले ही इसकी सूचना दी गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने और नदी तथा जलाशयों के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की गई है।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पानी के बहाव पर नजर बनाए हुए हैं। खासकर उन इलाकों में सतर्कता बढ़ाई जा रही है, जहां डैम से छोड़ा गया पानी पहुंचने की संभावना है।
फिलहाल चिंता की बात नहीं
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दोनों डैमों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, इसलिए तत्काल किसी तरह की घबराहट की स्थिति नहीं है। हालांकि, लगातार बारिश को देखते हुए एहतियात के तौर पर जलस्तर और पानी की आवक की लगातार निगरानी की जा रही है।
केंद्रीय जल आयोग और डीवीसी के अधिकारी दोनों डैमों की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की स्थिति और डैम में पानी की आवक के आधार पर आगे पानी छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।
लगातार बारिश बनी मुख्य वजह
पिछले तीन दिनों से धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण जलग्रहण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी डैम में पहुंच रहा है। यही वजह है कि मैथन और पंचेत दोनों डैमों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
लगातार बारिश के कारण आने वाले घंटों में भी डैम में पानी की आवक बढ़ने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में अधिकारियों की ओर से जलस्तर की निगरानी के साथ-साथ पानी की निकासी को भी नियंत्रित किया जा रहा है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन और डीवीसी की ओर से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। लोगों को नदी के किनारे, जल निकासी वाले क्षेत्रों और डैम से छोड़े गए पानी के संभावित मार्गों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
फिलहाल मैथन में 487 फीट और पंचेत में 416 फीट जलस्तर दर्ज किया गया है, जो दोनों जगहों पर खतरे के निशान से नीचे है। इसके बावजूद बारिश की लगातार स्थिति को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
अब सभी की नजर आने वाले घंटों में होने वाली बारिश और दोनों डैमों में पानी की आवक पर टिकी है। डीवीसी और केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि डैमों में बढ़ते जलस्तर को सुरक्षित सीमा में रखा जा सके।
