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पूर्व DCA महासचिव एस.ए. रहमान बोले- धोनी युग की तरह झारखंड के युवाओं के लिए फिर खुल रहे राष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे

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कन्हैया कुमार/धनबाद 

कुनैन कुरैशी के प्रदर्शन से धनबाद के क्रिकेटरों में नई उम्मीद, ईशान किशन की कप्तानी की भी सराहना

धनबाद: झारखंड के क्रिकेट गलियारों में इन दिनों युवा प्रतिभाओं को लेकर एक बार फिर उम्मीद और उत्साह का माहौल है। दलीप ट्रॉफी में युवा क्रिकेटर कुनैन कुरैशी के शानदार प्रदर्शन और झारखंड के कप्तान ईशान किशन की नेतृत्व क्षमता ने राज्य के उभरते क्रिकेटरों के बीच नई ऊर्जा पैदा की है। धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के पूर्व महासचिव एस.ए. रहमान का मानना है कि झारखंड क्रिकेट एक बार फिर ऐसे दौर की ओर बढ़ रहा है, जहां छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

रहमान के अनुसार, जिस तरह महेंद्र सिंह धोनी के दौर में झारखंड के क्रिकेटरों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिले और कई खिलाड़ियों ने देश की टीम तक का सफर तय किया, उसी तरह मौजूदा दौर में भी झारखंड के युवाओं के लिए नए रास्ते खुलते दिखाई दे रहे हैं। कुनैन कुरैशी का संघर्ष और उन्हें मिले अवसर इस बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

अंडर-23 में बल्ले और गेंद दोनों से किया प्रभावित

एस.ए. रहमान ने बताया कि कुनैन कुरैशी ने अंडर-23 मुकाबलों में अपने हरफनमौला प्रदर्शन से चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने करीब 470 से अधिक रन बनाने के साथ 27 विकेट हासिल कर अपनी उपयोगिता साबित की। बल्ले और गेंद दोनों से लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें शुरुआती मौकों के लिए इंतजार करना पड़ा।

रहमान का कहना है कि क्रिकेट में कई बार प्रतिभा होने के बावजूद टीम संयोजन, परिस्थितियों और उपलब्ध अवसरों के कारण किसी खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। कुनैन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हालांकि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आने दी। आखिरकार जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने उसे पूरी तरह भुनाया।

फाइनल में प्रदर्शन ने बढ़ाया भरोसा

दिलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में कुनैन कुरैशी के प्रदर्शन को उनके क्रिकेट करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साउथ जोन के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज के साथ खेल दिखाया, उससे यह साफ हुआ कि बड़े मंच पर दबाव के बीच भी वह अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं।

रहमान ने कहा कि शाहबाज नदीम जैसे अनुभवी और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच कुनैन की खेल शैली ने यह दिखाया कि धनबाद और झारखंड की धरती पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही समय पर सही मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है।

ईशान किशन ने जताया भरोसा, प्लेइंग इलेवन में दिया मौका

कुनैन कुरैशी की सफलता के पीछे झारखंड के कप्तान ईशान किशन की भूमिका की भी सराहना हो रही है। बताया गया कि शुरुआती 15 सदस्यीय चयन सूची में कुनैन का नाम नहीं होने के बावजूद ईशान किशन ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा जताया और उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका दिया।

रहमान के मुताबिक, यही एक अच्छे कप्तान की पहचान होती है कि वह केवल स्थापित खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि टीम के भीतर मौजूद युवा प्रतिभाओं को भी पहचानता है और उन्हें बड़े मंच पर खुद को साबित करने का अवसर देता है।

ईशान किशन इससे पहले भी अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को अपनी कप्तानी में खिताब दिलाने और फाइनल मुकाबले में शतकीय पारी खेलने के बाद उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि वह दबाव की परिस्थितियों में टीम को आगे से नेतृत्व देने की क्षमता रखते हैं।

‘लीड फ्रॉम द फ्रंट’ की मिसाल बने ईशान

रहमान ने ईशान किशन की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि एक कप्तान का काम केवल खुद अच्छा प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि टीम के दूसरे खिलाड़ियों की क्षमता को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाना भी है। कुनैन कुरैशी को अवसर देना इसी सोच का हिस्सा माना जा सकता है।

उनका कहना है कि यदि युवा खिलाड़ियों को इसी तरह लगातार अवसर और मार्गदर्शन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में झारखंड से कई और क्रिकेटर रणजी ट्रॉफी, आईपीएल और राष्ट्रीय टीम तक पहुंच सकते हैं।

धोनी के दौर की याद, ईशान को लेकर भी बड़ी उम्मीदें

झारखंड क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी के योगदान का जिक्र करते हुए एस.ए. रहमान ने कहा कि वर्ष 2007 में धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम द्वारा टी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत हुई थी। झारखंड की प्रतिभाओं को भी इससे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

रहमान का मानना है कि मौजूदा दौर में ईशान किशन में भी नेतृत्व की ऐसी क्षमता दिखाई देती है, जिसे सही तरीके से विकसित किया जाए तो वह भारतीय टी-20 क्रिकेट में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार, ईशान को भारतीय टी-20 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपने पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

धनबाद के युवा खिलाड़ियों को मिला बड़ा संदेश

कुनैन कुरैशी की कहानी धनबाद के युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है। स्थानीय स्तर पर क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों के बीच यह संदेश गया है कि सीमित संसाधनों और शुरुआती दौर में अवसर नहीं मिलने के बावजूद निरंतर मेहनत जारी रखी जाए तो बड़े मंच पर जगह बनाई जा सकती है।

धनबाद क्रिकेट में लंबे समय से प्रतिभाओं की मौजूदगी रही है। जरूरत बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त प्रतियोगिताओं और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समय पर अवसर देने की है। कुनैन की सफलता ने एक बार फिर इस चर्चा को तेज कर दिया है कि धनबाद और झारखंड के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मजबूत क्रिकेट ढांचे की आवश्यकता है।

नए अध्याय की शुरुआत

एस.ए. रहमान का मानना है कि कुनैन कुरैशी का संघर्ष और ईशान किशन का नेतृत्व झारखंड क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यदि युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर मिलते रहे और उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन मिलता रहा तो आने वाले समय में झारखंड से कई प्रतिभाएं भारतीय क्रिकेट को मिल सकती हैं।

धनबाद के क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी यह समय उम्मीदों से भरा है। कुनैन कुरैशी की सफलता ने स्थानीय खिलाड़ियों को यह भरोसा दिया है कि धनबाद से राष्ट्रीय टीम तक का रास्ता मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। अब नजर इस बात पर होगी कि कुनैन आने वाले मुकाबलों में अपने प्रदर्शन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और झारखंड के दूसरे युवा खिलाड़ी इस सफलता से कितनी प्रेरणा लेते हैं।

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