खिलाड़ियों की नाराजगी के बीच गोल्फ ग्राउंड में डिजनीलैंड मेला लगाने की तैयारी, मैदान बचाने की मांग फिर तेज
कन्हैया कुमार/धनबाद
धनबाद: आखिर इतने विवाद और विरोध के बावजूद खिलाड़ियों की उपेक्षा कोई कैसे कर सकता है? यह बड़ा सवाल इन दिनों कोयलांचल के खिलाड़ी और खेल प्रेमी जनता जिला प्रशासन से पूछ रही है। धनबाद जैसे औद्योगिक शहर में पहले से ही खेल के मैदानों की कमी है। ऐसे में शहर के बीचों-बीच स्थित रणधीर वर्मा स्टेडियम यानी गोल्फ ग्राउंड को खेल गतिविधियों के बजाय मेले के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर खिलाड़ियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बताया जा रहा है कि 25 सितंबर से गोल्फ ग्राउंड में डिजनीलैंड मेला लगाए जाने की तैयारी है। मेला आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अनुमति दिए जाने के बाद खिलाड़ियों और खेल संगठनों की चिंता और बढ़ गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान केवल खाली जमीन नहीं है, बल्कि यह शहर के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए अभ्यास और खेल गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में लंबे समय तक मैदान का उपयोग मेले के लिए होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।
धनबाद में पहले से मैदानों की कमी
धनबाद में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। क्रिकेट, फुटबॉल, एथलेटिक्स, बैडमिंटन समेत विभिन्न खेलों में जिले के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। बावजूद इसके खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी समस्या पर्याप्त खेल मैदान और बेहतर खेल सुविधाओं की है।
खिलाड़ियों का तर्क है कि जब शहर में खेल के लिए उपलब्ध मैदान सीमित हैं, तो जो मैदान खिलाड़ियों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं, उनका इस्तेमाल खेल गतिविधियों के लिए ही होना चाहिए। उनका कहना है कि शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई बड़े भूखंड और मैदान मौजूद हैं, जहां नियमित रूप से बड़ी संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करने नहीं जाते। यदि मेला आयोजित करने के पीछे रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देना उद्देश्य है, तो प्रशासन को वैकल्पिक स्थानों पर भी विचार करना चाहिए।
गोल्फ ग्राउंड को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
रणधीर वर्मा स्टेडियम, जिसे आम तौर पर गोल्फ ग्राउंड के नाम से जाना जाता है, धनबाद शहर के बीच में स्थित है। यह स्थान लोगों की पहुंच में होने के कारण विभिन्न खेल गतिविधियों और आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब इसी मैदान में डिजनीलैंड मेला लगाए जाने की खबर के बाद खिलाड़ियों ने विरोध जताया है। खिलाड़ियों का कहना है कि मेले के कारण मैदान का सामान्य उपयोग बाधित होगा। इसके अलावा मेले के लिए भारी संख्या में लोगों की आवाजाही, अस्थायी निर्माण और अन्य गतिविधियों से मैदान की स्थिति प्रभावित होने की चिंता भी जताई जा रही है।
खिलाड़ियों का सवाल है कि अगर मैदान को कुछ समय के लिए मेले के लिए दिया भी जा रहा है, तो क्या उसके बाद मैदान को पहले की स्थिति में वापस लाने की पूरी जिम्मेदारी तय की गई है? क्या यह सुनिश्चित किया गया है कि मेला समाप्त होने के बाद खिलाड़ियों को मैदान व्यवस्थित रूप से वापस मिल जाएगा?
उपायुक्त से भी लगाई गई थी गुहार
गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद खिलाड़ियों ने अपनी चिंता को लेकर धनबाद उपायुक्त को लिखित आवेदन भी दिया था। आवेदन के माध्यम से खिलाड़ियों ने प्रशासन से आग्रह किया था कि मेले के लिए कोई वैकल्पिक स्थान चुना जाए और गोल्फ ग्राउंड को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से समझेगा और उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। लेकिन अब मेला आयोजन की स्वीकृति मिलने के बाद खिलाड़ियों में निराशा का माहौल है।
खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने अपनी बात पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के सामने रखी। आवेदन देकर समस्या बताई, जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया और मैदान बचाने की मांग की। इसके बावजूद यदि मैदान को मेले के लिए दिया जाता है तो इससे खिलाड़ियों के बीच यह संदेश जाएगा कि खेल से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
विधायक राज सिन्हा ने भी उठाई थी आवाज
गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने के मुद्दे पर धनबाद विधायक राज सिन्हा ने भी खिलाड़ियों की चिंता को गंभीरता से लिया था। उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों के हित में इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाया जाएगा।
विधायक के बयान के बाद खिलाड़ियों को उम्मीद जगी थी कि उनके पक्ष में मजबूत आवाज उठेगी और प्रशासन मैदान को मेले के लिए देने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा। लेकिन अब जिला प्रशासन की ओर से मेला आयोजन की अनुमति मिलने की बात सामने आने के बाद खिलाड़ियों की उम्मीदों को झटका लगा है।
कई जनप्रतिनिधियों से भी मिले खिलाड़ी
खिलाड़ियों ने केवल जिला प्रशासन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कई जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर लिखित आवेदन सौंपे और गोल्फ ग्राउंड को मेले के लिए नहीं देने की मांग की। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि उनके मुद्दे को प्रशासन के सामने मजबूती से रखेंगे और कोई वैकल्पिक समाधान निकलेगा।
लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। यही वजह है कि खिलाड़ियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
रोजगार बनाम खेल सुविधाओं का सवाल
मेला आयोजन के पक्ष में यह तर्क दिया जा सकता है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर व्यापार और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। मेले में छोटे-बड़े दुकानदारों, झूला संचालकों, खान-पान से जुड़े व्यवसायियों और अन्य लोगों को काम मिलता है।
खिलाड़ी भी रोजगार और स्थानीय व्यापार के महत्व से इनकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि समस्या मेले से नहीं, बल्कि खेल मैदान के इस्तेमाल को लेकर है।
खिलाड़ियों का कहना है कि यदि प्रशासन के पास ऐसे अन्य स्थान उपलब्ध हैं जहां मेला आयोजित किया जा सकता है और वहां खिलाड़ियों की गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी, तो उन स्थानों पर विचार किया जाना चाहिए। इससे रोजगार और मनोरंजन की गतिविधियां भी चल सकती हैं और खिलाड़ियों का मैदान भी सुरक्षित रह सकता है।
क्या वैकल्पिक स्थल पर नहीं हो सकता मेला?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मेला लगाने के लिए गोल्फ ग्राउंड को ही क्यों चुना गया? क्या प्रशासन ने शहर और उसके आसपास मौजूद अन्य संभावित स्थलों का गंभीरता से आकलन किया है?
खिलाड़ियों का कहना है कि धनबाद शहर के बाहरी हिस्सों में कई ऐसे मैदान या खुले स्थान हैं, जहां नियमित खेल गतिविधियों का दबाव गोल्फ ग्राउंड की तुलना में कम है। यदि वहां मूलभूत सुविधाएं विकसित कर दी जाएं तो बड़े आयोजनों के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे एक तरफ खिलाड़ियों का मैदान सुरक्षित रहेगा, वहीं दूसरी तरफ बड़े आयोजनों के लिए शहर के बाहर वैकल्पिक स्थानों का विकास भी होगा।
खिलाड़ियों की मांग—मैदान खेल के लिए सुरक्षित रहे
खिलाड़ियों की मुख्य मांग है कि गोल्फ ग्राउंड को प्राथमिकता के आधार पर खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन को किसी कारणवश मेले के आयोजन की अनुमति देनी ही है, तो उसकी अवधि सीमित रखी जाए और मैदान को नुकसान से बचाने के लिए स्पष्ट शर्तें तय की जाएं।
साथ ही मेला समाप्त होने के बाद मैदान को पूरी तरह व्यवस्थित कर खिलाड़ियों को वापस सौंपने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजर
गोल्फ ग्राउंड को लेकर खिलाड़ियों और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब एक बड़े सवाल में बदलता जा रहा है—क्या विकास और रोजगार के नाम पर खेल सुविधाओं से समझौता किया जा सकता है?
धनबाद में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पहले से ही पर्याप्त सुविधाओं की कमी की शिकायतें आती रही हैं। ऐसे में मौजूदा खेल मैदानों का संरक्षण और बेहतर रखरखाव बेहद जरूरी है।
25 सितंबर से प्रस्तावित डिजनीलैंड मेले को लेकर अब खिलाड़ियों की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। खिलाड़ियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी भावनाओं और खेल के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर पुनर्विचार करेगा और ऐसा समाधान निकालेगा जिससे रोजगार और मनोरंजन की गतिविधियां भी जारी रहें तथा खिलाड़ियों का खेल मैदान भी सुरक्षित रहे।
फिलहाल, गोल्फ ग्राउंड में मेले को लेकर खिलाड़ियों की नाराजगी बरकरार है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है। सवाल सिर्फ एक मेले का नहीं, बल्कि धनबाद में खेल मैदानों के संरक्षण और खिलाड़ियों के भविष्य का है।
