जमीन, कारोबार और विवाद… धनबाद के ‘नटवरलाल’ के कारनामों की लंबी कहानी
कन्हैया कुमार/ धनबाद
धनबाद में हब इंडिया पर गंभीर आरोपों की फेहरिस्त, जमीन विवाद से लेकर धोखाधड़ी और धमकी तक उठे सवाल
भेलाटांड़ में 38 प्लॉट के म्यूटेशन रद्द होने का मामला, हीरक रोड की निर्वाणा सिटी पर भी विवाद; कारोबारी ने साझेदारों पर कार्यालय में जबरन कब्जा और धमकी देने का लगाया आरोप
धनबाद: ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत इन दिनों धनबाद में संचालित हब इंडिया से जुड़े विवादों के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप है कि लोगों को जमीन और कारोबार से जुड़े बड़े-बड़े सपने दिखाकर उनसे लेन-देन करने वाली कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ जब मीडिया में सवाल उठाए जाते हैं तो जवाब देने के बजाय नोटिस और दबाव का सहारा लिया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है। The Times Net के पास इस पूरे मामले से जुड़े कई दस्तावेज मौजूद है, यह बताने के लिए काफी है कि धनबाद में नटवरलाल की भूमिका में कंपनी और उनके लोग कार्य कर रहे है ।तमाम कागजात के आधार पर कंपनी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला केवल एक विवाद तक सीमित नहीं है। धनबाद में हब इंडिया और उससे जुड़े लोगों को लेकर जमीन की खरीद-बिक्री, प्लॉट के म्यूटेशन, निर्माणाधीन परियोजना और कारोबारी साझेदारी में कथित धोखाधड़ी जैसे अलग-अलग आरोप सामने आए हैं। इन घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो प्रशासन और पुलिस के स्तर पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस होती है।
भेलाटांड़ में जमीन का मामला, 38 प्लॉट का म्यूटेशन रद्द
हब इंडिया से जुड़े विवादों में सबसे प्रमुख मामला धनबाद के भेलाटांड़ क्षेत्र की जमीन का बताया जा रहा है। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान ऐसे दस्तावेज और भरोसा दिया गया, जिसके आधार पर उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदे।
भुक्तभोगियों के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री के बाद विधिवत निबंधन कराया गया और बाद में संबंधित प्लॉटों का म्यूटेशन भी हुआ। कई खरीदारों ने अपनी जमीन पर मकान तक बना लिए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जमीन से संबंधित जांच हुई, जिसमें कथित तौर पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद 38 प्लॉट के म्यूटेशन को रद्द कर दिया गया।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर जमीन के दस्तावेजों में गड़बड़ी थी तो उन लोगों का क्या कसूर, जिन्होंने सरकारी प्रक्रिया पर भरोसा करते हुए अपनी मेहनत की कमाई लगाई? जिन लोगों ने रजिस्ट्री कराई, म्यूटेशन कराया और जमीन पर घर बनाया, उनके हितों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
भुक्तभोगियों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदते समय तमाम औपचारिकताएं पूरी की थीं। ऐसे में अगर बाद में जमीन के कागजात में कोई खामी सामने आई तो इसकी जिम्मेदारी उन लोगों पर तय होनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज तैयार किए या जमीन की खरीद-बिक्री कराई।
The Times Net के पास उपलब्ध दस्तावेजों में इस मामले से जुड़े जमीन के विवरण और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित कागजात मौजूद है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह भी सवाल है कि जिन लोगों के म्यूटेशन रद्द किए गए, उन्हें न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कार्रवाई की गई?
निर्वाणा सिटी पर भी जमीन विवाद, एसडीओ कोर्ट तक पहुंचा मामला
दूसरा मामला धनबाद के हीरक रोड स्थित बिरसा मुंडा पार्क के सामने निर्माणाधीन निर्वाणा सिटी से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां भी जमीन के एक भूखंड को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद और तनाव की स्थिति सामने आई।
उपलब्ध न्यायालयीय दस्तावेज के अनुसार, जमीन के एक भूखंड पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। मामले को लेकर धनबाद के अनुमंडल दंडाधिकारी न्यायालय में आवेदन दिया गया। न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 के तहत निषेधात्मक कार्रवाई की। आदेश में संबंधित भूमि पर जबरन कब्जे या ऐसी गतिविधि से रोकने की बात कही गई है, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
दस्तावेज में विवादित भूमि के कई खाता और प्लॉट नंबरों का उल्लेख है तथा कुल रकबा 37.50 डिसमिल यानी लगभग 22.70 कट्ठा बताया गया है। दस्तावेज के मुताबिक विवादित भूमि पर जबरन कब्जे के प्रयास को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की गई थी।
इस मामले में भी बड़ा सवाल यही है कि आखिर जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद की नौबत क्यों आई और प्रशासनिक आदेश के बाद वास्तविक स्थिति क्या है? यदि किसी पक्ष के पास वैध दस्तावेज हैं तो उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर समाधान निकालना चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर गलत दस्तावेज अथवा गलत तरीके से जमीन पर दावा किया गया है तो उसकी जांच भी जरूरी है।
तीसरा मामला सबसे गंभीर, कारोबारी ने लगाया धोखाधड़ी और धमकी का आरोप
हब इंडिया से जुड़ा तीसरा मामला हाल में सामने आया है, जिसने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। सरायढेला थाना क्षेत्र के एक कारोबारी राहुल गोस्वामी ने हब इंडिया से जुड़े तीन लोगों पर धोखाधड़ी, कार्यालय में जबरन कब्जा करने, नकदी ले जाने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
राहुल गोस्वामी ने सरायढेला थाना प्रभारी को दिए आवेदन में राजीव रंजन, पंकज कुमार और मनमीत सिंह को लेकर शिकायत की है। शिकायतकर्ता के अनुसार वह व्यावसायिक साझेदारी के तहत कार्यालय का संचालन करते थे।
आवेदन में राहुल गोस्वामी ने दावा किया है कि 25 मई 2025 को शाम करीब पांच बजे उन्होंने व्यवसायिक साझेदारी से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पहले भी पुलिस को जानकारी दी थी।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि 28 मई 2025 को उनकी अनुपस्थिति में आरोपियों ने कथित तौर पर कार्यालय का ताला खोल दिया और अंदर रखी करीब दो लाख रुपये की नकदी अपने कब्जे में ले ली। इसके साथ ही जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी कार्यालय से ले जाने का आरोप लगाया गया है।
मामला यहीं नहीं रुकता। राहुल गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि उनके कोटक बैंक खाते से चेक के माध्यम से रकम निकालने और ऑनलाइन माध्यम से निजी खातों में पैसे भेजने का प्रयास भी किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे वित्तीय धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस से पूरे मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
मीडिया को नोटिस या डराने की कोशिश ?
इस पूरे प्रकरण का पर्दाफाश दस्तावेजों के आधार पर मीडिया ने किया तो ये जनाब इतने बौखला गए कि इन्होंने नोटिस भेज कर डराने का प्रयास किया ।जबकि होना यह चाहिए कि यदि किसी कंपनी या उसके संचालकों के खिलाफ दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए जाते हैं तो बेहतर रास्ता यही है कि संबंधित कंपनी सामने आकर दस्तावेजों और तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखे।
किसी मीडिया संस्थान को नोटिस भेजना अपने आप में आरोपों को सही या गलत साबित नहीं करता। इसी तरह मीडिया में प्रकाशित आरोप भी तब तक अंतिम सत्य नहीं माने जा सकते, जब तक संबंधित जांच एजेंसी या न्यायालय उस पर निर्णय न दे। इसलिए जरूरी है कि हब इंडिया भी सामने आकर भेलाटांड़ जमीन मामले, निर्वाणा सिटी विवाद और राहुल गोस्वामी की शिकायत पर अपना स्पष्ट पक्ष रखे।
सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
एक ही कंपनी अथवा उससे जुड़े लोगों को लेकर अलग-अलग समय में जमीन और कारोबारी विवाद सामने आने के बाद प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। क्या सभी जमीन दस्तावेजों की जांच हुई? 38 प्लॉट के म्यूटेशन रद्द होने के पीछे पूरी प्रक्रिया क्या थी? जिन खरीदारों ने मकान बना लिए, उनके हितों की रक्षा कैसे होगी? निर्वाणा सिटी से जुड़े विवाद में न्यायालयीय आदेश का पालन हो रहा है या नहीं? और कारोबारी राहुल गोस्वामी की शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आ सकते हैं।
The Times Net के पास उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आए आरोपों के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि मामला गंभीर है और इसे केवल आपसी विवाद बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम लोगों की मेहनत की कमाई और जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कथित धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। धनबाद से The Times Net के लिए कन्हैया कुमार की रिपोर्ट ।
