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झरिया के बरारी छह नंबर बस्ती में जोरदार धमाके के साथ भू-धंसान, दरारों से निकला जहरीला धुआं और आग की लपटें

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संजय चौरसिया/धनबाद

धनबाद: कोयलांचल में जमीन के नीचे धधक रही आग और भू-धंसान का खतरा एक बार फिर सामने आया है। झरिया के लोदना क्षेत्र अंतर्गत बरारी छह नंबर बस्ती में गुरुवार को अचानक जोरदार धमाके के साथ जमीन धंसने से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। भू-धंसान के बाद जमीन पर गहरी दरारें पड़ गईं। इन दरारों से धुआं निकलता दिखाई दिया, जबकि कुछ स्थानों पर आग की लपटें भी नजर आईं। घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक हुए धमाके के बाद जब लोगों ने मौके की ओर देखा तो जमीन का एक हिस्सा धंसा हुआ था। जमीन पर बनी दरारों से धुआं निकल रहा था। आग की लपटें दिखाई देने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई। लोगों को आशंका है कि जमीन के नीचे पहले से मौजूद कोयला आग की चपेट में हो सकता है और इसके कारण जहरीली गैस बाहर निकल रही है।

धमाके के बाद मची अफरा-तफरी

घटना के बाद कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। आसपास रहने वाले लोग भू-धंसान वाली जगह से दूर रहने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि झरिया कोयलांचल में भूमिगत आग और भू-धंसान की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन आबादी वाले इलाके में इस तरह जमीन धंसने से लोगों की चिंता बढ़ जाती है।

लोगों का कहना है कि जमीन के नीचे यदि आग या गैस का दबाव मौजूद है और उसका समय रहते पता नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर बरसात के मौसम में जमीन की ऊपरी परत कमजोर होने से भू-धंसान का दायरा बढ़ने की आशंका भी लोग जता रहे हैं।

मुख्य सड़क को लेकर भी बढ़ी चिंता

भू-धंसान वाली जगह के पास से लक्ष्मी कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क गुजरती है। यही बात स्थानीय लोगों की चिंता को और बढ़ा रही है। लोगों का कहना है कि फिलहाल सड़क पर आवागमन जारी है, लेकिन अगर जमीन के नीचे की स्थिति में बदलाव होता है और भू-धंसान का दायरा बढ़ता है तो सड़क भी प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि सड़क और आसपास के आवासीय इलाकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्र की तत्काल जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि केवल ऊपर से मिट्टी डालकर गड्ढा भर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह पता लगाना जरूरी है कि जमीन के नीचे वास्तव में क्या स्थिति है।

अवैध खनन और कथित सुरंगों पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर एक बार फिर अवैध कोयला खनन का मुद्दा उठने लगा है। स्थानीय नेता सबूर गोराई ने आरोप लगाया कि इलाके में कथित रूप से अवैध कोयला खनन और सुरंगों के कारण जमीन के नीचे की स्थिति अस्थिर हुई है। उन्होंने बीसीसीएल प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।

हालांकि, अवैध खनन और कथित सुरंगों को भू-धंसान का प्रत्यक्ष कारण मानने से पहले संबंधित विभागों की जांच और तकनीकी रिपोर्ट जरूरी होगी। घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमिगत स्तर पर कहीं पुरानी खदान, खाली सुरंग या कोयले की आग मौजूद है तो उसकी पहचान कर उसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करना जरूरी है। उनका कहना है कि केवल सतह पर दिखाई दे रहे गड्ढे को भरने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

मौके पर पहुंची बीसीसीएल की टीम

घटना की सूचना मिलने के बाद बीसीसीएल की टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम ने भू-धंसान वाली जगह और आसपास के क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया। प्रबंधन की ओर से प्रभावित स्थान पर भराई कराने का आश्वासन दिया गया है।

बीसीसीएल की टीम के निरीक्षण के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का कहना है कि भराई के साथ-साथ भूमिगत स्थिति की भी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा इस तरह की घटना न हो।

सिर्फ भराई से नहीं होगा स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन के नीचे आग या गैस का स्रोत मौजूद है, तो सिर्फ ऊपर से मिट्टी भरने से समस्या कितने समय तक नियंत्रित रहेगी? लोगों का कहना है कि पहले भूमिगत आग, गैस और खाली सुरंगों की स्थिति का आकलन होना चाहिए।

लोगों ने मांग की है कि विशेषज्ञों की मदद से प्रभावित इलाके की तकनीकी जांच कराई जाए। जमीन के नीचे गैस की मौजूदगी, तापमान और भूमिगत आग की स्थिति का पता लगाने के बाद ही स्थायी सुरक्षा योजना तैयार की जाए।

आबादी की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

बरारी छह नंबर बस्ती में लोगों की चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह क्षेत्र पूरी तरह निर्जन नहीं है। आसपास लोगों की आवाजाही और आबादी है। ऐसे में भू-धंसान की घटना को केवल एक गड्ढे तक सीमित मानना जोखिम भरा हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर लोगों को वहां जाने से रोका जाना चाहिए। साथ ही आसपास के घरों और सड़क की भी निगरानी की जरूरत है। यदि जमीन में नई दरारें दिखाई देती हैं या धुआं और आग बढ़ती है, तो तत्काल सुरक्षा कदम उठाए जाने चाहिए।

झरिया में भू-धंसान का खतरा फिर चर्चा में

झरिया क्षेत्र लंबे समय से भूमिगत कोयला आग और भू-धंसान जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। समय-समय पर अलग-अलग इलाकों में जमीन में दरारें और धंसान की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में बरारी छह नंबर बस्ती की घटना ने एक बार फिर इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और भूमिगत आग से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल बीसीसीएल की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया है और प्रभावित हिस्से में भराई कराने की बात कही है। लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को केवल तत्काल मरम्मत तक सीमित न रखा जाए। भूमिगत स्थिति की वैज्ञानिक जांच, आग और जहरीली गैस के स्रोत की पहचान तथा आसपास के लोगों और सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

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