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खेल के मैदान पर मेले की नजर, गोल्फ ग्राउंड को लेकर फिर उठे सवाल

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कन्हैया कुमार /धनबाद 

धनबाद :- धनबाद शहर के बीचोंबीच स्थित रणधीर वर्मा स्टेडियम, जिसे आम तौर पर गोल्फ ग्राउंड के नाम से जाना जाता है, इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। चर्चा इस बार किसी खेल प्रतियोगिता या खेल आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मैदान में प्रस्तावित मेले को लेकर है। जिले में बच्चों और युवाओं के लिए खेलकूद का पर्याप्त बुनियादी ढांचा पहले से ही सीमित है। ऐसे में शहर के प्रमुख खेल मैदानों में शामिल गोल्फ ग्राउंड का लंबे समय तक व्यावसायिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर खिलाड़ियों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है।

गोल्फ ग्राउंड में सुबह से ही बच्चों और युवाओं की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। कोई यहां क्रिकेट का अभ्यास करता है तो कोई फुटबॉल की तैयारी में जुटा रहता है। बड़ी संख्या में लोग सुबह के समय व्यायाम और दौड़ लगाने के लिए भी मैदान का उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि इस मैदान को लंबे समय के लिए मेले के आयोजन के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है, तो इसका सीधा असर खेल गतिविधियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दरअसल, इसी वर्ष 8 मई से 16 जून तक गोल्फ ग्राउंड में डिज्नीलैंड मेले का आयोजन किया गया था। मेले के कारण मैदान का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक खेल गतिविधियों से दूर रहा। उस दौरान यहां नियमित रूप से खेलने वाले बच्चों और युवाओं ने इसका विरोध भी किया था। खिलाड़ियों का कहना था कि शहर में खेल के लिए पर्याप्त मैदान नहीं हैं और जो मैदान उपलब्ध हैं, उन्हें भी यदि लगातार मेले और अन्य व्यावसायिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा तो बच्चों के खेल और अभ्यास के लिए जगह कहां बचेगी।

उपायुक्त ने दिया था खेल के लिए मैदान सुरक्षित रखने का आश्वासन

डिज्नीलैंड मेले को लेकर उठे विरोध के बाद जिले के उपायुक्त आदित्य रंजन की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि गोल्फ ग्राउंड का उपयोग खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाएगा। मेले के आयोजन के लिए धनबाद में पांच स्थान चिन्हित किए जाने की बात कही गई थी, ताकि मेला आयोजक उन वैकल्पिक स्थानों पर अपने आयोजन कर सकें।

उस समय प्रशासन की ओर से यह संदेश गया था कि बच्चों और खिलाड़ियों के खेल से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसके बाद खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उम्मीद जगी थी कि गोल्फ ग्राउंड को अब नियमित रूप से खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध रखा जाएगा और यहां लंबे समय तक चलने वाले मेले या अन्य व्यावसायिक आयोजन नहीं होंगे।

लेकिन अब सामने आ रही नई जानकारी ने एक बार फिर इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।

दुर्गा पूजा मेले के लिए सात आवेदन

सूत्रों के अनुसार, आगामी दुर्गा पूजा के मद्देनजर गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने के लिए कुल सात लोगों ने आवेदन दिया है। बताया जा रहा है कि इन आवेदकों में एक आवेदन बिहार के आरा से, तीन आवेदन धनबाद से, एक रांची से और दो आवेदन बोकारो से प्राप्त हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, इन आवेदनों में आगामी 1 अक्टूबर से गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने की अनुमति मांगी गई है। खास बात यह है कि आवेदकों ने महज कुछ दिनों के आयोजन के लिए नहीं, बल्कि 32 दिनों से लेकर 66 दिनों तक मेला लगाने की अनुमति मांगी है।

यानी यदि इन आवेदनों में से किसी को अनुमति मिलती है और प्रस्तावित अवधि के अनुसार मेला आयोजित होता है, तो गोल्फ ग्राउंड एक महीने से लेकर दो महीने से अधिक समय तक खेल गतिविधियों के लिए प्रभावित रह सकता है।

नगर निगम से सामान्य शाखा तक पहुंचा मामला

बताया जा रहा है कि गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने से संबंधित ये आवेदन पहले धनबाद नगर निगम को दिए गए थे। इसके बाद इन आवेदनों को सामान्य शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया। फिलहाल सामान्य शाखा की ओर से इन आवेदनों पर विचार किए जाने की बात सामने आ रही है।

यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन की ओर से पहले ही गोल्फ ग्राउंड को खेल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की बात कही जा चुकी है, तो फिर लंबे समय तक चलने वाले मेले के लिए प्राप्त आवेदनों पर विचार किस आधार पर किया जा रहा है।

हालांकि अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है और प्रशासनिक स्तर पर मामले पर विचार किया जा रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर जिला प्रशासन के अगले आदेश पर टिकी हुई है।

32 से 66 दिन तक मेला, खिलाड़ियों की चिंता बढ़ी

गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने के लिए मांगी गई अवधि को देखते हुए खिलाड़ियों की चिंता और बढ़ गई है। 32 दिन का आयोजन भी मैदान की खेल गतिविधियों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है, जबकि 66 दिनों की अनुमति मिलने की स्थिति में इसका प्रभाव दो महीने से अधिक समय तक रह सकता है।

मेले के आयोजन से सिर्फ मैदान के इस्तेमाल पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि मेला लगाने, स्टॉल लगाने, झूले और अन्य संरचनाएं खड़ी करने तथा आयोजन समाप्त होने के बाद मैदान को सामान्य स्थिति में लाने में भी समय लग सकता है। ऐसे में खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास बाधित होने की आशंका है।

क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों के लिए नियमित अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण होता है। बच्चों को प्रतियोगिताओं की तैयारी करनी होती है और इसके लिए उन्हें लगातार मैदान की जरूरत होती है। यदि लंबे समय तक मैदान उपलब्ध नहीं रहता है तो खिलाड़ियों की तैयारी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सुबह की कसरत से लेकर क्रिकेट-फुटबॉल तक, मैदान का है व्यापक उपयोग

गोल्फ ग्राउंड की खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल केवल किसी एक खेल के लिए नहीं होता। सुबह होते ही यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। बच्चे और युवा दौड़ लगाते हैं, व्यायाम करते हैं और अलग-अलग खेलों का अभ्यास करते हैं।

क्रिकेट खेलने वाले बच्चे अपने साथ बल्ला और गेंद लेकर पहुंचते हैं। फुटबॉल खेलने वाले युवा भी नियमित अभ्यास करते हैं। इसके अलावा कई लोग अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए मैदान में दौड़ और व्यायाम करते हैं।

यानी गोल्फ ग्राउंड केवल एक खाली जमीन नहीं, बल्कि शहर के लोगों के लिए सार्वजनिक खेल और फिटनेस का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में इसे लंबे समय के लिए किसी व्यावसायिक आयोजन के लिए देने का फैसला सिर्फ एक आयोजन से जुड़ा मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसका सीधा संबंध शहर की खेल संस्कृति से जुड़ जाता है।

क्या प्रशासन अपने पुराने फैसले पर कायम रहेगा?

अब सबसे अहम सवाल जिला प्रशासन के सामने है। एक तरफ मेला आयोजकों की ओर से आवेदन दिए गए हैं और दूसरी तरफ पहले ही उपायुक्त आदित्य रंजन की ओर से गोल्फ ग्राउंड को खेल के लिए उपयोग किए जाने की बात कही जा चुकी है।

ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इन आवेदनों पर क्या फैसला लेता है। क्या गोल्फ ग्राउंड को मेले के लिए अनुमति दी जाएगी या फिर पहले से चिन्हित पांच वैकल्पिक स्थानों पर ही मेला लगाने की व्यवस्था की जाएगी?

खेल प्रेमियों की नजर भी अब इसी निर्णय पर टिकी है। खिलाड़ियों का मानना है कि यदि शहर में बच्चों के लिए खेल मैदान सीमित हैं, तो उपलब्ध मैदानों को सुरक्षित रखना जरूरी है। वहीं दूसरी ओर मेले और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी शहर में उचित स्थान उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि विकास और मनोरंजन के साथ खेल गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

फैसला चाहे जो हो, बच्चों के खेल को प्राथमिकता देने की मांग

गोल्फ ग्राउंड को लेकर उठ रहा विवाद मूल रूप से खेल बनाम व्यावसायिक आयोजन का सवाल बनता जा रहा है। एक ओर मेले से लोगों को मनोरंजन का अवसर मिलता है और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियां बढ़ती हैं, लेकिन दूसरी ओर लंबे समय तक मैदान के इस्तेमाल से बच्चों और युवाओं के नियमित खेल पर असर पड़ता है।

ऐसे में प्रशासन के सामने संतुलन बनाने की चुनौती है। यदि मेले के लिए शहर में पहले से पांच स्थान चिन्हित किए गए हैं, तो खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की उम्मीद है कि इन वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल किया जाएगा और गोल्फ ग्राउंड को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

फिलहाल सात आवेदनों पर सामान्य शाखा की ओर से विचार किए जाने की बात सामने आ रही है। आवेदनों में 1 अक्टूबर से मेला लगाने और 32 से 66 दिनों तक मैदान उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अंतिम फैसला जिला प्रशासन को लेना है।

अब देखना होगा कि धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन इस पूरे मामले में क्या निर्णय लेते हैं। क्या गोल्फ ग्राउंड बच्चों और खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित रहेगा या फिर एक बार फिर मेले की चकाचौंध के बीच खेल का मैदान पीछे छूट जाएगा—इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

धनबाद से द टाइम्स नेट के लिए कन्हैया कुमार की रिपोर्ट।

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