केंदुआडीह के 170 विस्थापित परिवार बेलगड़िया शिफ्ट होने को तैयार, पुनर्वास पैकेज पर बनी सहमति
संजय चौरसिया /धनबाद
धनबाद के केंदुआडीह प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षित पुनर्वास को लेकर तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। राजपूत बस्ती और मुस्लिम बस्ती के करीब 170 विस्थापित परिवार बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गए हैं। हाल ही में राजपूत बस्ती में बड़ा गोप बनने और इलाके में लगातार भू-धंसान व गैस रिसाव के खतरे के बीच लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। इसी को देखते हुए केंदुआडीह वीटीसी में बीसीसीएल, जेआरडीए अधिकारियों और प्रभावित ग्रामीणों के बीच बैठक हुई। बैठक में पुनर्वास पैकेज और बेलगड़िया टाउनशिप में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सकारात्मक सहमति बनी। हालांकि, रैयतों का मामला अभी भी पेचीदा बना हुआ है। रैयत उचित मुआवजे और सुरक्षित पुनर्वास की मांग पर अब भी अड़े हैं। देखिए ये पूरी रिपोर्ट।
केंदुआडीह प्रभावित क्षेत्र की राजपूत बस्ती में करीब पांच दिन पहले बना बड़ा गोप स्थानीय लोगों के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है। जमीन के नीचे लगातार हो रही हलचल और भू-धंसान की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही इलाके में गैस रिसाव का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित होना अब सबसे बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ रहा है।
इसी सिलसिले में केंदुआडीह वीटीसी में बीसीसीएल और जेआरडीए के अधिकारियों की प्रभावित ग्रामीणों के साथ बैठक हुई। बैठक में बेलगड़िया टाउनशिप में पुनर्वास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने विस्थापित परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं और आर्थिक सहायता की जानकारी दी। इसके बाद राजपूत बस्ती और मुस्लिम बस्ती के करीब 170 परिवारों ने बेलगड़िया जाने पर अपनी सहमति जताई।
पुनर्वास योजना के तहत प्रत्येक विस्थापित परिवार को बेलगड़िया टाउनशिप में दो क्वार्टर आवंटित किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा शिफ्टिंग के दौरान परिवारों को कुल डेढ़ लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें ₹50 हजार शिफ्टिंग भत्ता, ₹50 हजार किराया भत्ता और ₹50 हजार आजीविका सहायता शामिल है। पुनर्वास के छह महीने पूरे होने के बाद एक लाख रुपये की शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। इस तरह प्रत्येक परिवार को कुल ₹2.50 लाख की आर्थिक सहायता मिलने की बात सामने आई है।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि बेलगड़िया में अपनी सामाजिक और धार्मिक जरूरतों को पूरा करने की भी मांग रखी। ग्रामीणों ने मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग अधिकारियों के सामने रखी।
स्थानीय निवासी दीनानाथ सिंह के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि बेलगड़िया टाउनशिप में फिलहाल एक मस्जिद पहले से मौजूद है। वहीं, ग्रामीणों की मांग को देखते हुए अतिरिक्त मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान के निर्माण पर जेआरडीए की ओर से सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया गया है।
पुनर्वास पैकेज और अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रभावित बस्तियों के लोगों ने संतोष जताया है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षित आवास के साथ सामाजिक और धार्मिक सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाता है, तो बेलगड़िया में बसने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि, केंदुआडीह में रहने वाले सभी रैयत बेलगड़िया जाने के लिए तैयार नहीं हैं। भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बावजूद कई रैयत अपनी पुश्तैनी जमीन, जमीन के अधिकार और आजीविका को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि रैयत और गैर-रैयत को एक समान पुनर्वास पैकेज के दायरे में रखना उचित नहीं है।
रैयत शैलेश चंद्र घोष का कहना है कि रैयतों के पास जमीन का अधिकार है और उन्हें उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सुरक्षित पुनर्वास के साथ-साथ जमीन के उचित मूल्य का भुगतान भी जरूरी है। यदि सरकार और बीसीसीएल उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करती है, तो रैयत भी अपना घर छोड़ने को तैयार हैं।
रैयतों के मुआवजे और दावों को लेकर पीबी एरिया के जीएम जयंत के दास ने कहा कि केंदुआडीह क्षेत्र काफी समय पहले से डेंजर जोन घोषित है। बीसीसीएल प्रबंधन लगातार यहां रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होने का आग्रह कर रहा है। उन्होंने बताया कि खतरे की स्थिति को देखते हुए रैयतों से भी बेलगड़िया जाने की अपील की गई है।
रैयतों के दावों को लेकर उनके कागजातों की जांच की जाएगी। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मुआवजे और अन्य दावों पर प्रबंधन की ओर से निर्णय लिया जाएगा। जीएम के मुताबिक, फिलहाल 170 परिवारों ने बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने पर सहमति जताई है।
केंदुआडीह में लगातार बढ़ते भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बीच 170 परिवारों का बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने के लिए तैयार होना प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पुनर्वास पैकेज में दो क्वार्टर और कुल ₹2.50 लाख की आर्थिक सहायता की व्यवस्था से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित भविष्य की उम्मीद जगी है।
हालांकि, रैयतों के मुआवजे और पुश्तैनी जमीन से जुड़े सवाल अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। अब रैयतों के दस्तावेजों की जांच और उनके दावों पर होने वाला फैसला इस पूरी पुनर्वास प्रक्रिया की अगली दिशा तय करेगा। फिलहाल प्रभावित परिवारों की उम्मीद यही है कि सुरक्षित पुनर्वास के साथ उनकी सामाजिक, आर्थिक और जमीन से जुड़ी चिंताओं का भी उचित समाधान किया जाएगा।
