सात समुंदर पार से लौटी आस्था: ऑस्ट्रेलिया से भारत पहुंचे सुमित वत्स परिवार संग करेंगे छठ पूजा
KANHAIYA KUMAR/DHANBAD
धनबाद: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की गूंज अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रह गई है। यह पर्व आज पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक बन चुका है। विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोग भी हर साल पूरे उत्साह और भक्ति भाव से भगवान भास्कर और छठी मैया की आराधना करते हैं। यही वजह है कि अब छठ पर्व अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
इसी आस्था का उदाहरण हैं ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले सुमित वत्स, जो इस वर्ष अपने परिवार के साथ सात समुंदर पार से भारत लौटे हैं ताकि अपने घर और मातृभूमि की मिट्टी में पारंपरिक तरीके से छठ महापर्व मना सकें। धनबाद पहुंचने के बाद सुमित वत्स ने कहा, “हम भले ही विदेश में रहते हैं, लेकिन हमारे दिल में भारत की संस्कृति, आस्था और परंपरा रची-बसी है। छठ पर्व हमारे लिए सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक अवसर है।”
उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में भी हर साल भारतीय समुदाय के लोग मिलकर छठ घाट तैयार करते हैं, व्रत रखते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। वहाँ की समुद्र, नदियों, झीलों या कृत्रिम जलाशयों के किनारे यह पर्व पूरी श्रद्धा और सादगी से मनाया जाता है। लेकिन इस बार सुमित वत्स और उनका परिवार धनबाद के अपने पैतृक घाट पर पारंपरिक छठ पूजा करने पहुंचे हैं।
सुमित वत्स ने कहा, “छठ हमारे संस्कार और स्वाभिमान से जुड़ा पर्व है। विदेश में रहते हुए भी हम अपने बच्चों को यही सिखाते हैं कि भारत की परंपरा हमारी पहचान है। इसलिए इस बार हमने तय किया कि बच्चों को असली छठ का अनुभव भारत की मिट्टी में करवाया जाए।”
उनकी पत्नी श्यामली राय ने भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया में रहकर जब वे घाटों पर छठ गीत गाती थीं, तब भी मन भारत की यादों में खो जाता था। “यहां लौटकर वही गीत, वही वातावरण, वही मिट्टी की खुशबू मिल रही है। यह हमारे लिए भावनात्मक पल है,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
सुमित वत्स के छोटे बच्चे भी भारत लौटकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें घर की सजावट, दीये जलाना और घाटों पर होने वाली भीड़ बहुत अच्छा लग रहा है। “हमने ऐसा कभी नहीं देखा था, यहाँ सब लोग मिलकर काम करते हैं, यह बहुत सुंदर है,” बच्चे ने कहा।
धनबाद के स्थानीय लोगों के लिए भी यह गर्व का विषय है कि विदेशों में बसे लोग भी अपनी आस्था से इतने गहराई से जुड़े हुए हैं। छठ पर्व के दौरान न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से बल्कि दुबई, अमेरिका, यूके, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी लोग अपने घर लौटते हैं।
वाकई, छठ अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान बन चुका है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि चाहे हम कहीं भी रहें, अपनी जड़ों से जुड़ाव और संस्कृति के प्रति सम्मान कभी नहीं भूलना चाहिए।
