धनतेरस पर धनबाद में आस्था का उमड़ेगा सैलाब, लक्ष्मी-कुबेर की आराधना से होगी सुख-समृद्धि की कामना
कन्हैया कुमार/धनबाद
शाम 6:02 से 7:57 बजे तक पूजा का विशेष समय, धन्वंतरि पूजन से लेकर यमदीपदान तक निभाई जाएंगी परंपराएं
धनबाद: रोशनी के महापर्व दीपावली की शुरुआत के साथ ही धनतेरस को लेकर कोयलांचल में उत्सवी माहौल बनने लगा है। शुक्रवार को धनबाद सहित पूरे कोयलांचल में धनतेरस श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। लोग अपने परिवार की खुशहाली, बेहतर स्वास्थ्य, आर्थिक उन्नति और सुखद भविष्य की कामना लेकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के अधिपति भगवान कुबेर की आराधना करेंगे।
धनतेरस का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। यह दिन केवल नई वस्तुओं की खरीदारी या धन-संपत्ति के प्रदर्शन का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मकता के महत्व को समझने का भी संदेश देता है। यही वजह है कि इस दिन व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में पूजा करते हैं, तो गृहस्थ परिवार अपने घरों में दीप जलाकर मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें चिकित्सा, आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस पर्व पर धन के साथ अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करना भी विशेष महत्व रखता है।
प्रदोष काल में होगी मां लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना
धार्मिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक का समय शुभ माना गया है। प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करने का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों में पूजा स्थल को सजाकर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करेंगे।
मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य और वैभव बना रहता है, जबकि भगवान कुबेर की आराधना आर्थिक स्थिरता और संपन्नता का प्रतीक मानी जाती है। पूजा के दौरान दीप, धूप, पुष्प, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित कर परिवार की उन्नति की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी भी शुभ अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता माना गया है।
बाजारों में खरीदारी को लेकर रहेगा विशेष उत्साह
धनतेरस का नाम आते ही खरीदारी की परंपरा भी याद आती है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, पीतल और तांबे के बर्तन सहित विभिन्न घरेलू सामान खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर में लाई गई नई वस्तु समृद्धि और शुभता का प्रतीक होती है।
धनबाद के बाजारों में भी धनतेरस को लेकर विशेष चहल-पहल रहने की उम्मीद है। लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करेंगे। कई परिवार इस अवसर पर नए बर्तन, पूजा सामग्री, दीपक और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं। वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी विशेष सजावट की जाती है। दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर कारोबार में उन्नति की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर खरीदारी के लिए किसी बड़ी वस्तु का होना जरूरी नहीं है। व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटी-सी वस्तु खरीदकर भी इस परंपरा का निर्वहन कर सकता है। पर्व का वास्तविक भाव श्रद्धा, संतोष और मंगलकामना से जुड़ा है।
अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए किया जाता है यमदीपदान
धनतेरस की एक अन्य महत्वपूर्ण परंपरा यमदीपदान है। इस दिन संध्या के समय भगवान यमराज के नाम से दीप प्रज्वलित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है।
धनतेरस की शाम यमदीपदान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इसके साथ ही घर के अन्य हिस्सों में भी दीप प्रज्वलित कर वातावरण को प्रकाशमय बनाया जाता है।
धन और आरोग्य दोनों का संदेश देता है यह पर्व
धनतेरस का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। इस पर्व के माध्यम से समाज को यह संदेश मिलता है कि जीवन में धन जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण अच्छा स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख भी है। भगवान धन्वंतरि की पूजा आरोग्य का संदेश देती है, मां लक्ष्मी की आराधना समृद्धि का प्रतीक है और भगवान कुबेर का पूजन धन के संरक्षण एवं सदुपयोग की भावना को दर्शाता है।
त्योहारों को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे सकारात्मक संदेश के साथ मनाना चाहिए। धनतेरस पर घरों की साफ-सफाई, पूजा-अर्चना और दीपदान के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी पर्व की भावना को सार्थक बनाता है।
शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर कोयलांचल के घरों और प्रतिष्ठानों में दीपों की रोशनी के बीच मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की आराधना होगी। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा कर जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना करेंगे। धनतेरस के साथ ही धनबाद में दीपावली के उल्लास का आगाज भी हो जाएगा।
