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बाघमारा में बिरहोर बच्चों को मिले विशेष CTEV जूते, RBSK टीम ने अभिभावकों को भी किया जागरूक

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धनबाद: जिला प्रशासन की पहल पर बाघमारा प्रखंड के अत्यंत पिछड़े बिरहोर समुदाय के बच्चों को जन्मजात क्लबफुट (CTEV) की समस्या से राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के निर्देश पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम ने जरूरतमंद बच्चों के बीच विशेष CTEV जूते वितरित किए।

जन्म से पैरों के मुड़े होने की समस्या को CTEV यानी क्लबफुट कहा जाता है। समय पर उपचार और नियमित देखभाल नहीं होने पर बच्चों को चलने-फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे बच्चों के उपचार में विशेष ऑर्थोपेडिक जूते महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से बिरहोर समुदाय के बच्चों तक यह सुविधा पहुंचाई गई।

जिला प्रशासन के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरदराज और वंचित इलाकों में रहने वाले बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक या सामाजिक पिछड़ेपन के कारण कोई बच्चा जरूरी उपचार से वंचित न रहे। बिरहोर समुदाय के बच्चों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता और अंतिम पंक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास को दर्शाती है।

RBSK टीम ने बच्चों को CTEV जूते उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी इसके नियमित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। अभिभावकों को बताया गया कि जूतों का सही तरीके से और निर्धारित अवधि तक उपयोग करना उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। इसके अलावा बच्चों की फिजियोथेरेपी, नियमित जांच और जूतों के रखरखाव को लेकर भी आवश्यक जानकारी दी गई।

RBSK टीम ने कहा कि प्रशासन के मार्गदर्शन और सहयोग से समाज के अंतिम पायदान पर रहने वाले जरूरतमंद बच्चों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल रही है। टीम ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के उपचार में किसी तरह की लापरवाही न बरतें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार CTEV जूतों का नियमित इस्तेमाल कराएं।

जिला प्रशासन की इस पहल से बिरहोर समुदाय के उन बच्चों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो क्लबफुट जैसी जन्मजात समस्या से जूझ रहे हैं। समय पर उपचार, विशेष जूतों के नियमित इस्तेमाल और फिजियोथेरेपी के माध्यम से बच्चों को सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम बनाने की दिशा में यह प्रयास अहम माना जा रहा है।

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