भारत-जापान रक्षा संबंधों को नई मजबूती, पीएम मोदी ने जापानी रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी से की अहम मुलाकात
रघुवेंद्र प्रताप सिंह /दिल्ली
दिल्ली :- नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी से मुलाकात की। जापानी रक्षा मंत्री अपनी पहली भारत यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं के बीच भारत-जापान के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच Special Strategic and Global Partnership हिंद-प्रशांत और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लगातार मिल रही गति पर संतोष जताया और भविष्य में इसे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत जापान की कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। इससे भारत में रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले जापानी रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने मुंबई स्थित भारतीय नौसेना के वेस्टर्न नवल कमांड का दौरा किया। उन्होंने नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन से मुलाकात की। उन्हें भारतीय नौसेना की भूमिका, जिम्मेदारियों और परिचालन क्षमताओं की जानकारी दी गई। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोत INS Chennai का भी दौरा किया और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।
वहीं, 20 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापानी रक्षा मंत्री कोइज़ुमी के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, रक्षा उपकरण और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग तथा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसैनिक सहयोग, समुद्री जागरूकता और सुरक्षा समन्वय को बढ़ाने के साथ रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास और उत्पादन की संभावनाओं पर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत-जापान की यह बढ़ती रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। दोनों देशों का साझा लक्ष्य एक स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है।
