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म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन पर पुलिस की पैनी नजर

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संजय चौरसिया /धनबाद

धनबाद। जिले में बढ़ते वित्तीय साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर धनबाद पुलिस ने बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में गुरुवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में बैंक प्रबंधकों के साथ दूसरे दिन भी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण एसपी श्री एस. मोहम्मद याकूब ने की। बैठक में साइबर डीएसपी श्री प्रदीप कुमार साव, निरसा एसडीपीओ श्री लिलेश्वर महतो समेत निरसा अनुमंडल क्षेत्र के 50 से अधिक सरकारी एवं निजी बैंकों के शाखा प्रबंधक शामिल हुए।

बैठक में मुख्य रूप से म्यूल बैंक अकाउंट, संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन, नए खुले खातों में अचानक होने वाले बड़े ट्रांजैक्शन और साइबर ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किए जाने के मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने बैंक प्रबंधकों को ऐसे खातों की पहचान कर तत्काल पुलिस को सूचना देने का निर्देश दिया।

ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी ठगी की रकम को कुछ ही समय के भीतर कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। रकम के लगातार अलग-अलग खातों में जाने के कारण उसकी ट्रैकिंग और रिकवरी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में बैंक स्तर से समय पर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी पुलिस को उपलब्ध होने पर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के साथ-साथ अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है।

नए खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन पर जोर

बैठक के दौरान बैंक अधिकारियों को नए खुले खातों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। खाताधारकों के फिजिकल वेरिफिकेशन, केवाईसी प्रक्रिया और खाते से जुड़े मोबाइल नंबर के सत्यापन को गंभीरता से लेने पर जोर दिया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे खातों पर विशेष नजर रखी जाए, जिनमें खाता खुलने के तुरंत बाद असामान्य रूप से बड़े पैमाने पर लेनदेन शुरू हो जाए।

इसके अलावा यदि किसी एक इलाके से अचानक बड़ी संख्या में बैंक खाते खोले जा रहे हों या कोई व्यक्ति लगातार अलग-अलग लोगों के बैंक खाते खुलवाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा हो, तो इसकी जानकारी भी पुलिस के साथ साझा करने को कहा गया।

ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के लेनदेन की भी होगी निगरानी

बैठक में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर भी बैंक प्रबंधकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने कहा कि ऐसे लेनदेन में यदि किसी खाते का असामान्य तरीके से इस्तेमाल होता दिखाई दे या खाते के संचालन का पैटर्न संदिग्ध लगे तो बैंक स्तर पर उसकी जांच कर आवश्यक सूचना पुलिस को उपलब्ध कराई जाए।

समय पर सूचना से रोकी जा सकती है ठगी की रकम

ग्रामीण एसपी ने कहा कि वित्तीय साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच त्वरित सूचना साझा करना और बेहतर समन्वय सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। साइबर अपराधी ठगी के बाद रकम को तेजी से कई खातों में घुमाते हैं। यदि शुरुआती स्तर पर ही संदिग्ध खाते और ट्रांजैक्शन चिन्हित हो जाएं तो रकम को आगे जाने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से पुलिस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी बिना देरी के साझा करने की अपील की।

धनबाद पुलिस का लक्ष्य बैंकिंग सिस्टम में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध और म्यूल खातों की समय रहते पहचान करना तथा इनके जरिए संचालित साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है। बैठक में मौजूद बैंक प्रबंधकों ने भी साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस के साथ बेहतर समन्वय और आवश्यक सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर सहयोग का भरोसा दिलाया।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बैंकिंग संस्थानों और आम खाताधारकों की सतर्कता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान और सूचना से साइबर ठगी के मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

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