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बाल विवाह के खिलाफ डीएवी निरसा के छात्रों ने खोला मोर्चा, पेंटिंग और वाद-विवाद से दिया सामाजिक संदेश

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संजय चौरसिया /धनबाद

निरसा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार, धनबाद के तत्वावधान में डीएवी पब्लिक स्कूल, निरसा में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के बीच पेंटिंग एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और विचारों के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को उजागर करते हुए समाज को जागरूकता का संदेश दिया।

कार्यक्रम में एलएडीसीएस के डेप्युटी चीफ अजय कुमार भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह महज एक सामाजिक कुरीति नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्र विकास और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित करता है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में विवाह का दायित्व सौंपना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी बाधा डालता है। कम उम्र में विवाह और उसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां बच्चों के शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करती हैं तथा उनके सामने आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता है।

जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है प्राधिकार

अजय कुमार भट्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्राधिकार का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके तहत जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श एवं विधिक जागरूकता उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों को जानने और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी समाज को सशक्त बनाती है और जागरूक नागरिक ही सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बाल विवाह रोकना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

डेप्युटी चीफ ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करना केवल प्रशासन या कानून-व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज और युवाओं को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दें। उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि “बच्चों के हाथों में किताबें और सपनों की उड़ान होनी चाहिए, विवाह का बोझ नहीं। न बाल विवाह करेंगे, न होने देंगे और न ही उसके प्रति मौन रहेंगे।”

शिक्षा बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर : प्राचार्य

विद्यालय की प्राचार्य डाॅ. झूमा माहाता ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह में बड़ी बाधा है। शिक्षा ही वह शक्ति है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से बाल विवाह के खिलाफ स्वयं जागरूक होने और अपने परिवार एवं समाज में भी जागरूकता फैलाने की अपील की।

प्राचार्य ने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रहेगा, तभी समाज और देश का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना विकसित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

कार्यक्रम के दौरान आयोजित पेंटिंग एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बाल विवाह के खिलाफ अपनी सोच को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। किसी ने अपनी पेंटिंग के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले नुकसान को दर्शाया, तो किसी ने वाद-विवाद के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल अधिकार और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विनायक मल्लिक, देव भण्डारी, पल्लवी प्रिया और परी तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दिव्या सोनकर, रोशनी कुमारी और बार्नीक माझी द्वितीय स्थान पर रहे। वहीं खुशी कुमारी साव, अंकुश दास और राय कर्मकार देव कर ने तृतीय स्थान हासिल किया, जबकि अमित कुमार को चतुर्थ स्थान प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, पैरालगल वॉलंटियर पंकज कुमार वर्मा एवं फूल चंद महतो सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ जागरूकता ही सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव है और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें शिक्षा, अवसर एवं सुरक्षित बचपन मिलना जरूरी है।

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