नगर निकाय चुनाव का ऐलान: दिग्गजों की एंट्री, नए चेहरों की भरमार और जनता के फैसले की घड़ी
KANHAIYA KUMAR/9560160137
DHANBAD:- काफी लंबे इंतजार के बाद आखिरकार धनबाद नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है। चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही कोयलांचल की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गर्म हो गई है। इस बार का नगर निकाय चुनाव खास तौर पर महापौर पद को लेकर बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। कारण साफ है—एक तरफ पुराने और अनुभवी दिग्गज मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर कई ऐसे नए चेहरे भी सामने आ रहे हैं जिन्हें आम जनता अभी ठीक से जानती भी नहीं, लेकिन वे पूरे लाव-लश्कर और धनबल के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
धनबाद में इस बार महापौर पद के लिए 40 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है। इनमें कई नए चेहरे होंगे, तो कई ऐसे नाम भी हैं जो पहले से ही राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं। खास बात यह है कि इस बार चुनाव केवल चेहरे और प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्याशियों की सामाजिक पकड़, जनसंपर्क, संगठनात्मक ताकत और जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता भी निर्णायक भूमिका निभाएगी।
धनबल बनाम जनबल की जंग
धनबाद का यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कई ऐसे प्रत्याशी मैदान में दिखाई दे रहे हैं जिनके पास पांच साल पहले तक न तो राजनीतिक पहचान थी और न ही कोई खास आर्थिक हैसियत। लेकिन आज वही प्रत्याशी धनबल के सहारे बड़े-बड़े काफिलों के साथ वार्डों और मोहल्लों में दौरा करते नजर आ रहे हैं। यह स्थिति जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल पैसा चुनाव जीताने के लिए काफी होगा या फिर इस बार जनता विकास और भरोसे को तरजीह देगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार धनबल और जनबल के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। हालांकि अंततः फैसला जनता के हाथ में ही होगा, और वही तय करेगी कि महापौर की कुर्सी पर कौन बैठेगा।
सिंह मेंशन पर टिकी निगाहें
अगर इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा की जाए तो वह सिंह मेंशन के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। सभी प्रमुख प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की नजरें सिंह मेंशन पर टिकी हुई हैं। इसकी वजह है संजीव सिंह की लगातार बढ़ती लोकप्रियता। कोल बेल्ट क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच उनकी सक्रियता ने बाकी प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संजीव सिंह को महापौर पद का प्रत्याशी बनाती है, तो उन्हें कोयलांचल क्षेत्र में इसका सीधा लाभ मिल सकता है। स्थानीय मुद्दों को लेकर उनकी मुखरता और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता भाजपा के लिए एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकती है।
हालांकि भाजपा ने अभी तक अपने आधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। पार्टी के भीतर कुल 14 लोगों ने महापौर पद के लिए दावेदारी पेश की है, जिनमें संजीव सिंह का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। ऐसे में सभी संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थक भाजपा के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
पूर्व महापौर की वापसी की तैयारी
दूसरी ओर, पूर्व महापौर चंद्र शेखर अग्रवाल ने पहले ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। वह इस बार पूरी तैयारी के साथ जनता के बीच उतर चुके हैं। खास बात यह है कि वह अपने पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के दरबार में पहुंच रहे हैं। सड़क, नाली, जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए गए कार्यों को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रहे हैं।
चंद्र शेखर अग्रवाल का दावा है कि उनके कार्यकाल में धनबाद नगर निगम क्षेत्र में कई ऐसे काम हुए, जिनका फायदा आज भी जनता को मिल रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता उनके अनुभव को कितना महत्व देती है और क्या उन्हें एक बार फिर मौका देना चाहती है।
कांग्रेस और झामुमो की रणनीति
कांग्रेस पार्टी की बात करें तो अभी तक उसने भी अपने महापौर प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस से शमशेर आलम समेत तीन अन्य नेताओं ने महापौर पद पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। पार्टी के भीतर मंथन जारी है और माना जा रहा है कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर लिया जाएगा। कांग्रेस इस बार संगठन को मजबूत कर चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश में है, ताकि पिछली हार की भरपाई की जा सके।
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्रीय सदस्य नीलम मिश्रा को महापौर पद के लिए मैदान में उतार दिया है। नीलम मिश्रा सरकार द्वारा किए गए जनहित के कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रही हैं। वह राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही हैं। झामुमो का फोकस महिला मतदाताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों पर खास तौर पर नजर आ रहा है।
चुनावी तारीखें और मतदाता
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, धनबाद नगर निकाय चुनाव के लिए 29 जनवरी से 4 फरवरी तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 5 फरवरी को नामांकन पत्रों की स्क्रूटिनी होगी, जबकि 6 फरवरी को नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। 7 फरवरी को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। 23 फरवरी को मतदान होगा और 27 फरवरी को मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा की जाएगी।
धनबाद नगर निगम क्षेत्र में कुल 8,97,936 मतदाता हैं, जो इस बार अपने महापौर का चुनाव करेंगे। यह संख्या अपने आप में यह दर्शाती है कि धनबाद का चुनाव न सिर्फ स्थानीय बल्कि राज्य की राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम है।
जनता के फैसले पर टिकी निगाहें
भले ही चुनावी मैदान में कितने ही दिग्गज उतरें और कितना ही धन खर्च हो, लेकिन अंत में फैसला जनता को ही करना है। इस बार धनबाद की जनता किसे विकास का जिम्मा सौंपती है, यह 27 फरवरी को साफ हो जाएगा। फिलहाल शहर की सड़कों, गलियों और चौक-चौराहों पर केवल एक ही चर्चा है—कौन बनेगा धनबाद का अगला महापौर?
