सिजुआ 10 नंबर में तड़के जमीन फटी, कई घर ध्वस्त; मलबे में दबे लोगों को ग्रामीणों ने निकाला, एक बच्चे की मौत की सूचना
कन्हैया कुमार /धनबाद
धनबाद/कतरास। कोयलांचल धनबाद में जमीन धंसने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार की तड़के कतरास के सिजुआ 10 नंबर इलाके में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब अचानक जमीन फटने लगी और देखते ही देखते कई घर भरभराकर धराशायी हो गए। घटना सुबह करीब 5 बजे की बताई जा रही है। हादसे के वक्त अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि जमीन में दरार पड़ने के बाद आसपास के कई मकान इसकी चपेट में आ गए। मकानों के गिरने से कुछ लोग मलबे में दब गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव का काम शुरू किया तथा मलबे में फंसे लोगों को किसी तरह बाहर निकाला। हादसे में दो बच्चों और छह महिलाओं के घायल होने की बात सामने आ रही है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की सूचना है।
हादसे में एक बच्चे की मौत की भी सूचना सामने आई है। हालांकि, मृतक और घायलों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासन और पुलिस की ओर से किए जाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।
सोते-सोते दहशत में बदल गई सुबह
सिजुआ 10 नंबर में सुबह का वक्त लोगों के लिए भयावह साबित हुआ। अचानक जमीन के हिलने और घरों के गिरने की आवाज से आसपास के लोग जाग गए। देखते ही देखते घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग अपने स्तर पर राहत कार्य में जुट गए। जिस तरह से जमीन फटने के बाद मकान धराशायी हुए, उससे इलाके के लोगों में भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयलांचल के कई इलाकों में जमीन के नीचे वर्षों से चल रही कोयला खनन गतिविधियों का असर अब सतह पर दिखाई दे रहा है। पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों के अलावा अवैध कोयला उत्खनन के दौरान बनाई गई सुरंगों के कारण भी कई जगह जमीन के खोखले होने की आशंका जताई जाती रही है।
छाताबाद के बाद सिजुआ में हादसा
कतरास और झरिया इलाके में पिछले कुछ समय से लगातार भू-धंसान की घटनाएं सामने आती रही हैं। छाताबाद में हुई घटना के बाद मामला काफी सुर्खियों में रहा था। उस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे थे। सरकार के मंत्री ने भी घटनास्थल का जायजा लिया था और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित करने की बात कही गई थी।
इसके बावजूद कोयलांचल के अलग-अलग हिस्सों से लगातार जमीन धंसने और मकानों में दरार पड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सिजुआ 10 नंबर की घटना ने एक बार फिर प्रशासन, बीसीसीएल और पुनर्वास व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डेंजर जोन में अब भी रह रहे लोग
धनबाद का बड़ा हिस्सा लंबे समय से भूमिगत कोयला खनन का केंद्र रहा है। खनन गतिविधियों के कारण कई इलाकों में जमीन के अस्थिर होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित करने की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से कई बार असुरक्षित इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जाती है। पुनर्वास की योजनाएं भी बनाई गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जिन्हें संवेदनशील या डेंजर जोन माना जाता है।
बीसीसीएल और जरेडा पर पुनर्वास की जिम्मेदारी
भू धंसान प्रभावित लोगों के पुनर्वास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बीसीसीएल और जरेडा पर है। बीसीसीएल के कर्मियों को पुनर्वासित करने की जिम्मेदारी बीसीसीएल की है, जबकि गैर-बीसीसीएल कर्मियों और अन्य प्रभावित लोगों के पुनर्वास का दायित्व झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जरेडा) के माध्यम से पूरा किया जाना है।
सबसे बड़ी चुनौती ऐसे परिवारों की पहचान करना है, जो वास्तव में असुरक्षित क्षेत्रों में रह रहे हैं और जिन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। सिजुआ की ताजा घटना के बाद एक बार फिर इस प्रक्रिया को तेज करने की मांग उठ सकती है।
पुराने खनन क्षेत्र और अवैध उत्खनन बढ़ा रहे खतरा
कोयलांचल में जमीन धंसने की घटनाओं के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। कई स्थानों पर पहले भूमिगत कोयला खनन हुआ है और खदानें बंद होने के बाद भी जमीन के नीचे खाली स्थान मौजूद हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में अवैध उत्खनन के दौरान सुरंगनुमा रास्ते बनाए जाने से जमीन के भीतर खोखलापन पैदा होने की आशंका रहती है।
जब जमीन के नीचे मौजूद खाली हिस्सों का दबाव संतुलन बिगड़ता है तो ऊपर की सतह पर दरारें पड़ने और अचानक धंसान की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में पुराने खनन क्षेत्रों और अवैध खनन से प्रभावित इलाकों की वैज्ञानिक तरीके से जांच और मैपिंग बेहद जरूरी हो जाती है।
सवाल वही—कब होगा स्थायी समाधान?
सिजुआ की घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कोयलांचल में धंसान का स्थायी समाधान कब होगा? हर हादसे के बाद राहत, बचाव, मुआवजा और पुनर्वास की बातें होती हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हैं, सर्वे और सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा होती है, लेकिन कुछ समय बाद दूसरे इलाके से धंसान की नई घटना सामने आ जाती है।
मंगलवार की घटना में एक बच्चे की मौत की सूचना ने पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ा दी है। अब जरूरत केवल घटना के बाद राहत पहुंचाने की नहीं, बल्कि धंसान प्रभावित सभी क्षेत्रों का व्यापक सर्वे, डेंजर जोन में रह रहे परिवारों की पहचान और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करने की है। साथ ही पुराने खनन क्षेत्रों और अवैध उत्खनन से खोखली हुई जमीन की वैज्ञानिक जांच कर संभावित हादसों वाले इलाकों को पहले से चिन्हित करना जरूरी होगा।
सिजुआ में हुए इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कोयलांचल में जमीन के ऊपर बसे घरों की सुरक्षा का सवाल जमीन के नीचे छिपे खनन इतिहास से सीधे जुड़ा हुआ है।
