झरिया की बदहाली पर गरमाई सियासत, अभिषेक सिंह ने वर्तमान विधायक पर साधा निशाना
KANHAIYA KUMAR/DHANBAD
धनबाद/झरिया। देश की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों, औद्योगिक इकाइयों और महानगरों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला कोयलांचल का झरिया आज खुद गंभीर संकट से जूझ रहा है। जमीन के नीचे वर्षों से सुलगती आग, भू-धंसान का खतरा, प्रदूषण, जर्जर सड़कें, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने यहां के लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। झरिया की इन्हीं समस्याओं को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विकास को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
जनता मजदूर संघ बच्चा गुट के महामंत्री अभिषेक सिंह ने झरिया की वर्तमान स्थिति को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने वर्तमान विधायक के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के कार्यकाल से तुलना की और दावा किया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच झरिया में कई विकास कार्य धरातल पर दिखाई दिए, जबकि वर्तमान समय में विकास की गति को लेकर जनता में निराशा है।
अभिषेक सिंह ने कहा कि झरिया की जनता लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। उनका कहना है कि एक तरफ भूमिगत आग और भू-धंसान का खतरा लगातार बना हुआ है, तो दूसरी तरफ सड़क, पानी, नाली, बिजली, प्रदूषण और विस्थापन जैसी समस्याएं भी लोगों के सामने हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे विधानसभा से लेकर सरकार तक झरिया की समस्याओं को मजबूती से उठाएं और उसके समाधान के लिए योजनाएं धरातल पर उतारें।
2004 से 2019 तक एक ही परिवार का राजनीतिक प्रभाव
अभिषेक सिंह ने झरिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2004 के बाद लंबे समय तक झरिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर एक ही परिवार का प्रभाव रहा। उनके मुताबिक, वर्ष 2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें पहली बार लगा कि झरिया में वास्तविक विकास कार्यों की दिशा में तेजी आई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच का पूरा कार्यकाल विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। हालांकि इस अवधि के दौरान कोरोना महामारी के कारण करीब दो वर्षों तक विकास कार्य प्रभावित रहे। इसके बावजूद महामारी के बाद उपलब्ध सीमित समय में भी कई योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया गया।
अभिषेक सिंह ने कहा कि पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के कार्यकाल में झरिया के कई हिस्सों में सड़क, नाली, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य विकास योजनाओं पर काम हुआ। उन्होंने कहा कि जनता विकास कार्यों को अपनी आंखों से देखती है और इसी आधार पर जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल का मूल्यांकन भी करती है।
योजनाओं की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
वर्तमान व्यवस्था पर हमला करते हुए अभिषेक सिंह ने आरोप लगाया कि झरिया में सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और चहेते लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में है।
अभिषेक सिंह ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि झरिया में चल रही विकास योजनाओं की गुणवत्ता, लागत और क्रियान्वयन की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनने वाली सड़क, नाली, पुलिया और अन्य योजनाओं का लाभ लंबे समय तक आम लोगों को मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झरिया की वास्तविक जनसमस्याएं राजनीतिक प्राथमिकताओं में पीछे चली गई हैं। उनके मुताबिक, झरिया के लोगों को सबसे अधिक जरूरत सुरक्षित पुनर्वास, प्रदूषण नियंत्रण, बेहतर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार के अवसरों की है।
विधानसभा में झरिया की आवाज उठाने की मांग
अभिषेक सिंह ने वर्तमान विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधि को विधानसभा इसलिए भेजा है ताकि झरिया की समस्याओं को सदन में प्रमुखता से उठाया जा सके। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों और विभागों के सामने झरिया की समस्याओं को रखकर विशेष पैकेज और पर्याप्त राशि की मांग की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि झरिया में आउटसोर्सिंग, ट्रांसपोर्टिंग और कोयला कारोबार से जुड़े मामलों को लेकर भी लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या उसके करीबियों पर किसी तरह के आर्थिक हितों को लेकर आरोप लगाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसियों और प्रशासन को तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
आउटसोर्सिंग और ट्रांसपोर्टिंग को लेकर भी सवाल
झरिया में कोयला खनन और उससे जुड़ी गतिविधियां हमेशा से राजनीति का बड़ा मुद्दा रही हैं। आउटसोर्सिंग परियोजनाओं, परिवहन, रोजगार, विस्थापन और पर्यावरण को लेकर समय-समय पर स्थानीय लोगों और राजनीतिक संगठनों की ओर से सवाल उठते रहे हैं।
अभिषेक सिंह ने आरोप लगाया कि कोयला आधारित गतिविधियों से जुड़े हितों के कारण झरिया की मूल समस्याएं पीछे छूट रही हैं। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल खनन गतिविधियों को बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को सुरक्षित जीवन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।
उन्होंने कहा कि झरिया की जमीन के नीचे आग और ऊपर प्रदूषण के बीच रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल उनका भविष्य है। सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में दीर्घकालिक नीति बनानी चाहिए।
परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक तंज
अपने बयान के अंत में अभिषेक सिंह ने वर्तमान विधायक पर राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि झरिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जनता के बीच जाने से बचने के लिए परिसीमन की उम्मीद करना किसी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि झरिया का विकास इसी तरह होता रहा तो आने वाले समय में क्षेत्र की पहचान और स्वरूप ही बदल जाएगा।
उन्होंने कहा कि झरिया के लोगों को राजनीतिक नारों और आरोप-प्रत्यारोप से अधिक धरातल पर विकास चाहिए। जनता चाहती है कि उनके इलाके में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, बेहतर सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था हो।

झरिया में विकास और बदहाली को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्षी और श्रमिक संगठन वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान विधायक और उनके समर्थकों की ओर से इन आरोपों पर जवाब आने की उम्मीद है।
झरिया की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां विकास और पुनर्वास के सवाल को भूमिगत आग और खनन गतिविधियों के साथ संतुलित तरीके से देखा जाए। दशकों से आग और भू-धंसान के खतरे के बीच रह रहे परिवारों के लिए सुरक्षित पुनर्वास आज भी बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा प्रदूषण, रोजगार, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं को लेकर भी लगातार आवाज उठती रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि झरिया की जनता को आखिर कब स्थायी समाधान मिलेगा। विकास की घोषणाओं और राजनीतिक दावों से आगे बढ़कर योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचाना ही किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
फिलहाल अभिषेक सिंह के बयान ने झरिया की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि वर्तमान विधायक और सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों का क्या जवाब दिया जाता है और क्या आने वाले दिनों में झरिया के विकास को लेकर कोई ठोस रोडमैप सामने आता है। राजनीतिक बहस चाहे जितनी तेज हो, झरिया की जनता की प्राथमिकता साफ है—उसे आरोप नहीं, अपने शहर के लिए सुरक्षित भविष्य और धरातल पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
